नसबंदी कांड फैसला: 12 मौतों पर डॉक्टर दोषी, 12 साल बाद कोर्ट का निर्णय

Tue 24-Mar-2026,06:07 PM IST +05:30

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नसबंदी कांड फैसला: 12 मौतों पर डॉक्टर दोषी, 12 साल बाद कोर्ट का निर्णय Chhattisgarh-Sterilization-Case-Verdict
  • 2014 नसबंदी कांड में 12 महिलाओं की मौत के मामले में 12 साल बाद कोर्ट का फैसला, डॉक्टर को दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई।

  • ऑपरेशन में लापरवाही और दवाइयों की गुणवत्ता पर सवाल, स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही को लेकर फिर उठी बहस।

Chhattisgarh / Bilaspur :

Bilaspur/ छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2014 नसबंदी कांड में 12 साल बाद अदालत का अहम फैसला सामने आया है। बिलासपुर में हुए इस दर्दनाक हादसे में 12 महिलाओं की मौत के मामले में कोर्ट ने डॉक्टर को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह मामला लंबे समय से न्याय के इंतजार में था और अब आए फैसले ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस को तेज कर दिया है।

साल 2014 में सकरी स्थित नेमिचंद्र अस्पताल में एक सरकारी नसबंदी शिविर आयोजित किया गया था, जहां करीब 85 महिलाओं का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान एक-एक कर 12 महिलाओं की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया था और राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे थे।

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने डॉक्टर डॉ. आरके गुप्ता को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 2 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने माना कि ऑपरेशन प्रक्रिया में लापरवाही और मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। वहीं, इस मामले में शामिल महावर फार्मा कंपनी से जुड़े पांच अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि ऑपरेशन में इस्तेमाल की गई दवाइयों की गुणवत्ता संदिग्ध थी और स्वच्छता व सुरक्षा मानकों का भी पालन नहीं किया गया था। यही वजह थी कि महिलाओं की हालत तेजी से बिगड़ी। इस घटना के बाद तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी, लेकिन अंतिम रूप से जिम्मेदारी तय करने में लंबा समय लग गया।

इस फैसले के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि इतने बड़े हादसे में केवल एक व्यक्ति को दोषी ठहराना क्या पर्याप्त है। पीड़ित परिवारों को जहां न्याय की आंशिक संतुष्टि मिली है, वहीं सिस्टम की जवाबदेही और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को लेकर बहस तेज हो गई है।

यह मामला देशभर में चलने वाले सरकारी स्वास्थ्य अभियानों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यह फैसला स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।